साहित्यिक चौपाड़ि दशम् काआयोजन के १२ बैसार दरभंगा में समपन्न भेल
साहित्यिक चौपाड़ि दशम् आयोजन के १२ बैसार दरभंगा में समपन्न भेल
सुमित मिश्र गुंजन ,अपन मिथिला,दरभंगा, बैशाख ४गते ,
प्रत्येक मास जकाँ इहो बेर साहित्यिक चौपाड़ि दरभंगाक दशम् आयोजन काल्हि सेंट्रल लाइब्रेरी परिसरमे नीक सँ समपन्न भेल।एकटा विशेष गप्प जे इ चौपाड़िक बारहम मास छल।कूल ग्यारह गोटे उपस्थित छला। मैथिल प्रशांत,अक्षय आनंद सन्नी,राघवेन्द्र झा आ नवनीत झा पहिल बेर सम्मलित भेलथि। कार्यक्रमक संचालन सुमित मिश्र गुंजन केलथि।
प्रियरंजन झा दू टा कविता आ एकटा लप्रेकक पाठ केलनि ओतहि सुमित झा कविताक पाठ केलनि।मधुबनीसँ एल मैथिल प्रशांत दू टा कविता कहलनि जाहि मे एकटा कविता अपन कविता संग्रह "अखरा चान" सँ केलनि। मधुबनी सँ आयल एकटा आर कवि अक्षय आनंद सन्नी कविताक पाठ केलनि जाहि मे पेट्रोल कांड पर आधारित कविता विशेष छल।एहि क्रममे आबू बढी त' डॉ सत्येन्द्र झा दू टा कविता पढलनि जाहि मे एकटा व्यंग्य छल। अखिलेश झा एकटा आलेख आ एकटा कविता त' ओतहि राघवेन्द्र झा दू टा कविताक पाठ केलनि।अंत मे सुमित मिश्र 'गुंजन' दू टा गजल कहलनि।
नवनीत झा,विवेक आनंद आ सुन्दरम् झा श्रोता रुपे उपस्थित छला।हुनका सभके विशेष धन्यवाद।
आजुक कार्यक्रम बहुत सार्थक रहल। अंत मे भगवती सँ प्रार्थना जे इ चौपाड़ि अहिना चिरकाल धरि मैथिली भाषा आ साहित्य लेल काज करैत रहय।
✍👤सुमित मिश्र गुंजन
जय मिथिला! जय मैथिली!।
💖💖💖💖💖💖💖💗💗💜💜🌍💚💚💚💖
पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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सुमित मिश्र गुंजन ,अपन मिथिला,दरभंगा, बैशाख ४गते ,
प्रत्येक मास जकाँ इहो बेर साहित्यिक चौपाड़ि दरभंगाक दशम् आयोजन काल्हि सेंट्रल लाइब्रेरी परिसरमे नीक सँ समपन्न भेल।एकटा विशेष गप्प जे इ चौपाड़िक बारहम मास छल।कूल ग्यारह गोटे उपस्थित छला। मैथिल प्रशांत,अक्षय आनंद सन्नी,राघवेन्द्र झा आ नवनीत झा पहिल बेर सम्मलित भेलथि। कार्यक्रमक संचालन सुमित मिश्र गुंजन केलथि।
प्रियरंजन झा दू टा कविता आ एकटा लप्रेकक पाठ केलनि ओतहि सुमित झा कविताक पाठ केलनि।मधुबनीसँ एल मैथिल प्रशांत दू टा कविता कहलनि जाहि मे एकटा कविता अपन कविता संग्रह "अखरा चान" सँ केलनि। मधुबनी सँ आयल एकटा आर कवि अक्षय आनंद सन्नी कविताक पाठ केलनि जाहि मे पेट्रोल कांड पर आधारित कविता विशेष छल।एहि क्रममे आबू बढी त' डॉ सत्येन्द्र झा दू टा कविता पढलनि जाहि मे एकटा व्यंग्य छल। अखिलेश झा एकटा आलेख आ एकटा कविता त' ओतहि राघवेन्द्र झा दू टा कविताक पाठ केलनि।अंत मे सुमित मिश्र 'गुंजन' दू टा गजल कहलनि।
नवनीत झा,विवेक आनंद आ सुन्दरम् झा श्रोता रुपे उपस्थित छला।हुनका सभके विशेष धन्यवाद।
आजुक कार्यक्रम बहुत सार्थक रहल। अंत मे भगवती सँ प्रार्थना जे इ चौपाड़ि अहिना चिरकाल धरि मैथिली भाषा आ साहित्य लेल काज करैत रहय।
✍👤सुमित मिश्र गुंजन
जय मिथिला! जय मैथिली!।
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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