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मोन होईए ••••(कबिता)

मोन होईए ••••


✍👤👩अज्ञात
आँखिक एकटा पिपनी रहितौं
आहिंक नयन घर हम बसि जैतौं
नजैरक पहरेदार बनि क' हम
काजरक रंग म' रांगल रहितौं

मोन होईए ••••
आहांक पायल केर घुंघरू रहितौं
डेग धरैत स्वागत हम बजितौं
छन्-छन् छुन्-छुन् संगीत सुना क'
क्षण-क्षण आहांक मनोरंजन करितौं 

मोन होईए•••••
आहांक गरदैनक हार बनि रहितौं
सदिखन आहांक हृदयस्पर्षित रहितौं
गूथल रहितौं नेहक ताघा संग
टुटितो चरण अहिंक हम सजितौं

मोन होईए•••••
आहांक फुलबारिक गुलाब हम रहितौं
आहिंक हाथ सॅं  तोड़ल जैतौं
पबिरौं भोरे पहिल स्पर्ष जे सु:खमय
फेर मुरछाईतो आनंदित रहितौं



मोन होईए••••
झुमका आहांक कान केर रहितौं
झूलैत झूमैत हम मुखचुम्बन करितौं
ओहि अमोल स्पर्षक सप्पत
हे ! हमर कल्पनाक कविता 
आहां लेल अर्पन सब किछु करितौं
मोन होईए••••

            ✍👤👩अज्ञात


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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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