जुड़िशीतलमे सभकेँ जुड़ा दियौन यौ (जुड़िशीतल-गीत) - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

जुड़िशीतलमे सभकेँ जुड़ा दियौन यौ (जुड़िशीतल-गीत)

जुड़िशीतलमे सभकेँ जुड़ा दियौन यौ (जुड़िशीतल-गीत)


✍अमरनाथ मिश्र
*************
जुड़िशीतलमे सभकेँ जुड़ा दियौन यौ-२
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
साल नव मैथिलीक शुभागमन भेलै,
नव-नव अन्न-पानि आँगन-दलान भेलै,
शीतल सतुआक सतुआनि करा दियौ यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
टटका आ बसियाकेँ अजगुत विधान एलै,
फेँटि-फेँटि घाइठक बड़-बड़ी खोंटैल गेलै,
आमक टिकुलासँ चटनी बनबा दियौन यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
पौखरि-इनार गाम-घरक सफाई भेलै,
तुरिया-भजारमे थाल-कादो लेपाइ भेलै,
प्रेम चासैत, समारैत, गजारि दियौ यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
बाँसक दुइ खुट्टा पर बल्ली लटका दियौ,
तुलसी - चौड़ामे पानि सल्ला बना दियौ,
देव-पितर केर प्यासकेँ मिंझा दियौन यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ जुड़ा दियौन यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
           ********************
जुड़िशीतलक अनंत शुभकामनाक संग
✍👤अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि


कवि - अमरनाथ मिश्र जी 















💖💚💖💚💖💚💖💚💖💖💚💖💚💖💚💖
पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
💜💝💜💝💜💝💜💝💜💝💝💜💝💜💝💜

कोई टिप्पणी नहीं