अहाँके देखेला किन्को आँखि,सिसकैत अछि
अहाँके देखेला किन्को आँखि,सिसकैत अछि
✍👤राम सोगारथ यादब
अहाँके बोली सुनेला कोइ , तरसैत अछि
अहाँके देखेला किन्को आँखि,सिसकैत अछि
कहियो सोंचलीयै अहाँ , हमरा बिनु कोइ
दिन राति नहि हरेक छन तडपैत अछि
अहाँके देखैय जौं किन्को बाँहिमे, किन्को साथ
ओकरा मनमे आगिक धिधोरा, धनकैत अछि
एकतर्फी प्यारमे पगलायल ओ बेचरा
अहाँक एक मुस्की देखेला , भटकैत अछि
उ अभागी हमही छी , उ पागल हमही छी
जे हमर नयन अहाँक वाट , जोहैत अछि
✍👤राम सोगारथ यादव।
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पोस्ट- अशोक कुमार सहनी
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✍👤राम सोगारथ यादब
अहाँके बोली सुनेला कोइ , तरसैत अछि
अहाँके देखेला किन्को आँखि,सिसकैत अछि
कहियो सोंचलीयै अहाँ , हमरा बिनु कोइ
दिन राति नहि हरेक छन तडपैत अछि
अहाँके देखैय जौं किन्को बाँहिमे, किन्को साथ
ओकरा मनमे आगिक धिधोरा, धनकैत अछि
एकतर्फी प्यारमे पगलायल ओ बेचरा
अहाँक एक मुस्की देखेला , भटकैत अछि
उ अभागी हमही छी , उ पागल हमही छी
जे हमर नयन अहाँक वाट , जोहैत अछि
✍👤राम सोगारथ यादव।
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| कवि- राम सोगारथ यादब जी |
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पोस्ट- अशोक कुमार सहनी
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