मैथिल बेटी उवाच (अलेख)
मैथिल बेटी उवाच
✍👤नवीन ठाकुर
जे नै बजा से नै पाबा ? सिखने त साह छि हम अंहक समाज सं अपन नारी स्वभाव के परिभाषा ,अईख मुएँन क देखैत एलुहाँ एखन तक आँह सबहक हमरा प्रति संवेदनाक सीमा ! एखन भुर मून के बड कोशिश करैत छि मुदा अग्वे बाउल स प्लास्टर नै कायल जा सकैया ओहिमे सीमेंट आ पैन के जरुरत परैत छै ..........ई बुझी रखु !
हमरा छूछे दुलार नै नीक लागैत अछि , जखन अंहक मोनक बात बुझी जायब त दुलार काट ला दौगत ! मुदा बुझितो अनजान भेल रहैत छि कियक त हमर आब ई प्रकृति आ स्वाभाव भ गेल अछि ऐंठ खेबाके , हिसक अंहि सबके लागायल अछि ! हमर त्याग के प्रेम के त हमरा लग परिभ्षा अछि , मुदा आहाक के प्रेम के परिभाषा हम जिनगी भैर तकैत रेह गेलु मुदा आए तक नै भेटल ! हमरा पप्निये पर नोर रहैत अछि कियक त भीतर में आब जगह नै बांचल अछि तै बेर - बेर छलैक उठैया नेत्र , मुदा आन्हा सब त ई बात के फकरा बना देने छि ! मुदा सच्चाई के घोंट बड तित लागैत छै !
आब कने जग्बोकेलुहा त अनठा क गबदी मारने छि , जे सुतल रहैत छैक ओकरा ने जगायल जायत छैक , जे अनठा क गबदी मारने रहते ओ कन्हू जग्लैया ! हम प्रसंशा करैत छि 'दहेज़ मुक्त मिथिला के' सराहनीय डेग छैन नारी के सम्मान और उज्वल भविष्य के तरफ ,मुदा पैन पिला स भूख नै मरैत छै हाँ कने काल ले क्षुदा तृप्ति जरुर भेटैत छै ! यदि सच में अंहक हृदय में हमरा प्रति प्रेम अछि दुलार अछि अंहक समाजक व्यवहार में हमरा प्रति दोष देखाय देत अछि त, सर्वप्रथम पहिने बीमारी के जैर के बुझु ,ओकर तह तक जाऊ , टिटनस के बीमारी में बोखारक गोली असर नै करत !
बिना कोनो जिम्मेदारी के डोरी में बैन्ह क राखब कोण तरहक प्रेम छै हाम्रो नै मालूम ,ओई प्रेम के डोरी के साथ कीमत तय रहैत छै जे डोरी के छोर काल में चुक्ब परैत छैक , त हमर कहब जे ओ डोरी पकरने किया रहैत छि ? त्याग असल प्रेम छैक, यदि बचपन सं त्याग भावना रखितुहं त आए कीमत नै देब परैत प्रेमक डोरी के से सोचलिये कहियो ? हल्ला कक खली कोनो चीज बेचल जा सकैया ! हम अपन ऐंख स देखब आहक स्वभाव आ व्यवहार , निरपेक्षता तहन बुझब प्रेम !
कहल गेल छै घर दही त बाहरो दही ! अंहक नजैर के सब प्रतिक्रिया छैक , नै त पुरुष प्रधान समाज में स्त्री के कोनो जगह कियक नै भेटले आई तक , एहिमे किनकर दोष ? सुर - सुर आ मुर - मुर एक संगे नै होयत छैक ! जखन अपने आन्हा हमर नै छि त आन हमरा की बुझत ! आन्हा हमर की पहचान देलहुं एतबे ने की हम अंहक बेटी छि , आंह लग स जायब त अनेको रिस्ताक डोर चारू तरफ सं हमरा जकैर लेत , मुदा तैयो हम अपना के अकेला महसूस करब , अपन जगह के ताकब , मुदा रहत तखन ने भेटत !
लेखक ✍👤 नविन ठाकुर
✍👤नवीन ठाकुर
जे नै बजा से नै पाबा ? सिखने त साह छि हम अंहक समाज सं अपन नारी स्वभाव के परिभाषा ,अईख मुएँन क देखैत एलुहाँ एखन तक आँह सबहक हमरा प्रति संवेदनाक सीमा ! एखन भुर मून के बड कोशिश करैत छि मुदा अग्वे बाउल स प्लास्टर नै कायल जा सकैया ओहिमे सीमेंट आ पैन के जरुरत परैत छै ..........ई बुझी रखु !
हमरा छूछे दुलार नै नीक लागैत अछि , जखन अंहक मोनक बात बुझी जायब त दुलार काट ला दौगत ! मुदा बुझितो अनजान भेल रहैत छि कियक त हमर आब ई प्रकृति आ स्वाभाव भ गेल अछि ऐंठ खेबाके , हिसक अंहि सबके लागायल अछि ! हमर त्याग के प्रेम के त हमरा लग परिभ्षा अछि , मुदा आहाक के प्रेम के परिभाषा हम जिनगी भैर तकैत रेह गेलु मुदा आए तक नै भेटल ! हमरा पप्निये पर नोर रहैत अछि कियक त भीतर में आब जगह नै बांचल अछि तै बेर - बेर छलैक उठैया नेत्र , मुदा आन्हा सब त ई बात के फकरा बना देने छि ! मुदा सच्चाई के घोंट बड तित लागैत छै !
आब कने जग्बोकेलुहा त अनठा क गबदी मारने छि , जे सुतल रहैत छैक ओकरा ने जगायल जायत छैक , जे अनठा क गबदी मारने रहते ओ कन्हू जग्लैया ! हम प्रसंशा करैत छि 'दहेज़ मुक्त मिथिला के' सराहनीय डेग छैन नारी के सम्मान और उज्वल भविष्य के तरफ ,मुदा पैन पिला स भूख नै मरैत छै हाँ कने काल ले क्षुदा तृप्ति जरुर भेटैत छै ! यदि सच में अंहक हृदय में हमरा प्रति प्रेम अछि दुलार अछि अंहक समाजक व्यवहार में हमरा प्रति दोष देखाय देत अछि त, सर्वप्रथम पहिने बीमारी के जैर के बुझु ,ओकर तह तक जाऊ , टिटनस के बीमारी में बोखारक गोली असर नै करत !
बिना कोनो जिम्मेदारी के डोरी में बैन्ह क राखब कोण तरहक प्रेम छै हाम्रो नै मालूम ,ओई प्रेम के डोरी के साथ कीमत तय रहैत छै जे डोरी के छोर काल में चुक्ब परैत छैक , त हमर कहब जे ओ डोरी पकरने किया रहैत छि ? त्याग असल प्रेम छैक, यदि बचपन सं त्याग भावना रखितुहं त आए कीमत नै देब परैत प्रेमक डोरी के से सोचलिये कहियो ? हल्ला कक खली कोनो चीज बेचल जा सकैया ! हम अपन ऐंख स देखब आहक स्वभाव आ व्यवहार , निरपेक्षता तहन बुझब प्रेम !
कहल गेल छै घर दही त बाहरो दही ! अंहक नजैर के सब प्रतिक्रिया छैक , नै त पुरुष प्रधान समाज में स्त्री के कोनो जगह कियक नै भेटले आई तक , एहिमे किनकर दोष ? सुर - सुर आ मुर - मुर एक संगे नै होयत छैक ! जखन अपने आन्हा हमर नै छि त आन हमरा की बुझत ! आन्हा हमर की पहचान देलहुं एतबे ने की हम अंहक बेटी छि , आंह लग स जायब त अनेको रिस्ताक डोर चारू तरफ सं हमरा जकैर लेत , मुदा तैयो हम अपना के अकेला महसूस करब , अपन जगह के ताकब , मुदा रहत तखन ने भेटत !
लेखक ✍👤 नविन ठाकुर
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| लेखक - नवीन ठाकुर जी |


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