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पागल मोन के, कि कैह कऽ बुझेबै.

#मैथिली_गीत

पागल मोन के, कि कैह कऽ बुझेबै.

✍👤सूरज भरती


पागल मोन के, कि कैह कऽ बुझेबै.
टुटल  दिल  के, कतऽ  जा  लगेबै..
ओ तऽ प्रीत में हमरा, सजा दऽ गेलै.
हम जकरा चाहलियै, ओ बेवफा भऽ गेलै..

जिवन में आयल छऽल ओ, बैन कऽ हवा के झोका.
नेहक नै उगल ईजोरिया, गेल ओ दऽ कऽ धोखा..
नै जानी की हमरा सँ, खता भऽ गेलै.
हम जकरा चाहलियै, ओ बेवफा भऽ गेलै..

बुईझ कऽ शिसा दिल के, पाथर सँ तोईर ओ देलक.
जियै के संगे किरिया, खा कऽ छोईर ओ देलक..
बीच बाट में हाथ अप्पन, छोरा कऽ गेलै.
हम जकरा चाहलियै, ओ बेवफा भऽ गेलै..

बनल या सूरज भारती, सुनू यौ टुटल तारा.
भेटल नै साहिल हमरा, बिसरलौं अपन किनारा..
हरजाई तेना कऽ, डुबा कऽ गेलै.
हम जकरा चाहलियै, ओ बेवफा भऽ गेलै..

                गीतकार - सूरज भारती (8674940513)

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