मीठगर बोली मैथिली (गीत)
।॥मीठगर बोली मैथिली॥
******-गीत-******
✍👤सुबोध चौधरी
देशो घुमलौं,विदेशो घुमलौं,
ईहो सुनलौं,ऊहो सुनलौं।
मैथिली सन नै मीठगर बोली,
ई छै मीठ मिसरी कें गोली।
अपन सभक पहचान,
अपन भाषा छै मैथिली महान।
*
एहि भाषा पर रिझि गेला उगना,
नित भोरे जे गाबै सुगना।
निर्मल भाव छै गंगा यमुना,
राम बनल मैथिली कें पहुना।
धर्म'क भरल बखान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
*
अहि भाषाकें मान विद्यापति
एक पर एक विद्वान स्थापित।
यात्री सुमन आ मांडण ययाति,
पसरल अछि सबठम ई ख्याति।
आउ करी सम्मान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
*
नेनपन सँ नेहक छै साथी,
बुढ़िया दाय कें गावल पराती।
एहि बोली मे मायक लोरी,
पान मखान मांछ के झोरी।
अपन सभक छै जान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
*
हमहुँ बाजी अहुँ बाजियौ,
पढब लिखब सभकें समझाबियौ।
जग मे जगमग मैथिली हेतै,
अपन दीव स्वरूप इ पेतै।
राखबै सब मिलि धियान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
*
मन मे भाव 'सुबोध' छै गहींरि,
प्राण छुटै माँ मैथिली देहरी।
जा धरि प्राण गान इ गायब,
जन जन तक मैथिली पहुँचायब।
अतबहि छै अरमान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
---------
✍👤सुबोध चौधरी।
हरिपुर गुरमाहा।।
******-गीत-******
✍👤सुबोध चौधरी
देशो घुमलौं,विदेशो घुमलौं,
ईहो सुनलौं,ऊहो सुनलौं।
मैथिली सन नै मीठगर बोली,
ई छै मीठ मिसरी कें गोली।
अपन सभक पहचान,
अपन भाषा छै मैथिली महान।
*
एहि भाषा पर रिझि गेला उगना,
नित भोरे जे गाबै सुगना।
निर्मल भाव छै गंगा यमुना,
राम बनल मैथिली कें पहुना।
धर्म'क भरल बखान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
*
अहि भाषाकें मान विद्यापति
एक पर एक विद्वान स्थापित।
यात्री सुमन आ मांडण ययाति,
पसरल अछि सबठम ई ख्याति।
आउ करी सम्मान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
*
नेनपन सँ नेहक छै साथी,
बुढ़िया दाय कें गावल पराती।
एहि बोली मे मायक लोरी,
पान मखान मांछ के झोरी।
अपन सभक छै जान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
*
हमहुँ बाजी अहुँ बाजियौ,
पढब लिखब सभकें समझाबियौ।
जग मे जगमग मैथिली हेतै,
अपन दीव स्वरूप इ पेतै।
राखबै सब मिलि धियान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
*
मन मे भाव 'सुबोध' छै गहींरि,
प्राण छुटै माँ मैथिली देहरी।
जा धरि प्राण गान इ गायब,
जन जन तक मैथिली पहुँचायब।
अतबहि छै अरमान।
अपन भाषा छै मैथिली.....
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✍👤सुबोध चौधरी।
हरिपुर गुरमाहा।।


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