नकले हमर शकल छी की? (विचार )
नकले हमर शकल छी की?
अपन मिथिला / ऐँ यौ, जइ मिथिलाक धरतीकेँ 'रत्नगर्भा' कहल जाइ छै, ओइठामक लोकमे सृजनशीलता मरि गेलैए आ कि 'नकल'केँ हमसभ अपन 'शकल' बना लेने छी? मैथिली गीत-संगीतकेँ पैरोडीकेँ पहाडतर जाँतिकऽ तँ थौआ कइए देलियैए, नाम आ नारामे पर्यन्त नकलेक डुगडुगी बेसी बाजि रहल अछि! सेहो सन्दर्भे नइ मिलैके हिसाबेँ! एकटा रेडियो कार्यक्रम "हेल्लो मिथिला" नामसँ की लोकप्रिय भेल, नेपाल-भारत दुन्नूदिस अनेको मैथिली आर्केष्ट्रा खूजि गेल अही नामसँ। रेडियो कार्यक्रम हेल्लो मिथिला जतऽ मिथिलावासीक जीवनशैलीक प्रतिबिम्ब बनल रहल तँ कतेको अइ नामक आर्केष्ट्रा मैथिलीक संगसंग भोजपुरी हिन्दी नेपाली आदि भाषाक 'सब' तरहक गीत-नृत्यक 'जनरल अर्डर सप्लायर' बनल अछि। अइ अभियानमे एहन-एहन लोक सेहो संलग्न छथि जिनक अपने बेस पहिचान आ हैसियत छनि। ओसभ नाम मात्र जँ किछु अलग रखितथि/मौलिक रखितथि तँ मिथिलाक सृजनशील सोचक फलक निरन्तर विस्तृति पबैत जइतै।
हालहिँ वीरगञ्जक विकासक सन्दर्भमे कोनो सज्जन नारा तय कएने देखल गेलाह– 'सबका साथ सबको विकास'। बेशक उद्देश्य बेजाए नइ, मुदा की नारा सेहो अपन मौलिक नइ गढल जा सकैए?
मुदा सभसँ अखरि रहल अछि पछिला किछु माससँ सामाजिक सञ्जालमे देखाइत सीके राउतसँ जोडिकऽ आबि रहल एकटा नारा। सीके स्वयंमे बेस प्रज्ञावान आ सृजनशील लोक छथि। सभसँ पहिलबेर मैथिलीक फोन्ट 'तिरहुता' हमरासँ सहकार्य करैत उएह बनौने रहथि। हुनक इजोत अभियान होइनि या अन्य कतेको काज, हुनक सृजनशीलताक सशक्त उदाहरण अछि। आइकाल्हि युवा वर्गक संगसंग आमजनक मनमे सेहो नीकेजकाँ घर करैत गेलसन बुझाइत छथि। मुदा हुनक कार्यकर्तासभद्वारा एकटा नारा खूब देल जा रहल छै– 'हरहर सीके, घरघर सीके'। सभ जनै छी जे ई मोदीजीक सन्दर्भमे भारतमे लागल नारा 'हरहर मोदी घरघर मोदी'क पैरोडी अछि। अइसँ हमरासभक सृजनशीलता मात्र भोथ नइ देखाइए, अपितु ई स्पष्ट होइए जे नारासँ यथार्थक तालमेल बैसाबऽ मे सेहो हमसभ अलूरि छी। मोदीजीक सन्दर्भमे ओ नारा बहुत सटीक छल। कारण 'हर' महादेवकेँ कहल जाइ छै आ भाजपा हिन्दूवादी दल अछि। हिन्दूत्वक विषयकेँ पेटमे राखिकऽ मोदीकेँ आगाँ कएल गेल रहै। मुदा सीके राउतक कोनो दस्तावेजमे धर्मविशेषक नारा नइ देखल जाइ छै। एहनमे अइ नाराक की उपादेयता आ सान्दर्भिकता!
तसर्थ जाहि तरहेँ मधेश आन्दोलनक क्रममे हमसभ मेची-महाकाली मानव-शृङ्खला बनेलौँ, आन्दोलनात्मक झिझिया खेलएलौँ, गीत-नाटक-चित्रकला आदिक निर्माण आ प्रदर्शन केलौँ, तहिना आनो सन्दर्भमे नवीनता आ मौलिकताक खोज एवं प्रयोग कएल करी। अइसँ हमरासभमे सृजनशीलताक विकास सेहो होइत जाएत आ हमर उद्देश्य सेहो समधानल डेगसँ लक्ष्यदिस बढैत रहत।
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| श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि जी |


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