ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला नगरमे, पड़ल छल अकाल ( जानकी जन्म )
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला नगरमे, पड़ल छल अकाल
( जानकी जन्म )
✍👤 अशोक दत्त
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला नगरमे, पड़ल छल अकाल
जप–तप कऽ प्रजावात्सल्य राजा, कतेको कएलैन्हि उपाय
कऽ अनुष्ठान हर जोतए चललाह, राजा जनक महान
भूमि पूजन कऽ हर लऽ नृपति जोतऽ लगलैन्हि परती पराँत
सुगन्धी वयार संग प्रकाशपूञ्ज चमकल अजबे भेल चमत्कार
धरा गर्भसँ प्रकट भेलीह जानकी शुक्ल नओमी बैशाख मास
देवो निरखि कऽ पूmल बरसबैत गाबऽ लगलैन्हि मंगलगान
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला ……..
श्याम–कुटिल केश शिशुमृग नयनी चन्द्रमुखी देदीप्यमान
नयन जुड़ाएल हिया जुड़ाएलसबके हर्षक रहल ने ठेकान
ऋषि मुनी सिद्ध योगी तपस्वी संग मिथिला सकल समाज
दरश पाबि जानकीके सब गदगद करऽ लगल स्तुतिगान
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला ……..
जप तप सिद्ध भेल दिव्य दरश भेल नहि छल कनिको भान
हपसि सिरध्वज अंक लगाओल सीयाके सुनयना मुख मुस्कान
आदि शक्तिक एहि पावन भूमिमे कण–कण भरल उल्लास
बुन्द–बुन्द लेऽ तरसैत मिथिलामे भेल जलवृष्टि अमृत समान
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला ……..
( जानकी जन्म )
✍👤 अशोक दत्त
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला नगरमे, पड़ल छल अकाल
जप–तप कऽ प्रजावात्सल्य राजा, कतेको कएलैन्हि उपाय
कऽ अनुष्ठान हर जोतए चललाह, राजा जनक महान
भूमि पूजन कऽ हर लऽ नृपति जोतऽ लगलैन्हि परती पराँत
सुगन्धी वयार संग प्रकाशपूञ्ज चमकल अजबे भेल चमत्कार
धरा गर्भसँ प्रकट भेलीह जानकी शुक्ल नओमी बैशाख मास
देवो निरखि कऽ पूmल बरसबैत गाबऽ लगलैन्हि मंगलगान
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला ……..
श्याम–कुटिल केश शिशुमृग नयनी चन्द्रमुखी देदीप्यमान
नयन जुड़ाएल हिया जुड़ाएलसबके हर्षक रहल ने ठेकान
ऋषि मुनी सिद्ध योगी तपस्वी संग मिथिला सकल समाज
दरश पाबि जानकीके सब गदगद करऽ लगल स्तुतिगान
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला ……..
जप तप सिद्ध भेल दिव्य दरश भेल नहि छल कनिको भान
हपसि सिरध्वज अंक लगाओल सीयाके सुनयना मुख मुस्कान
आदि शक्तिक एहि पावन भूमिमे कण–कण भरल उल्लास
बुन्द–बुन्द लेऽ तरसैत मिथिलामे भेल जलवृष्टि अमृत समान
ज्ञानभूमि तपोभूमि मिथिला ……..
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| गीतकार - अशोक दत्त जी |


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